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Thursday, September 29, 2011

मरणोपरांत किसी कि आलोचना कायरता है.

जब तक इंसान जिंदा रहता है उसके साथ साथ का एक रिश्तों का जाल सा चलता रहता है. कोई भाई है , कोई दोस्त है, कोई दफ्तर का साथी है तो कोई दुश्मन हैं. कोई उसे देख खुश होता है कोई बुरा कहता. इन रिश्तों का उसकी म्रत्यु के साथ ही अंत सा हो जाता है. अब रह जाती हैं उसकी अच्छी बुरी यादें .
किसी भी शख्स में मोजूद अच्छाईयों को देखो और बुराईयों को नज़रंदाज़ करो यह जीवन का वो उसूल है जो हमेशा सुख देता है. हमारी आदत ठीक इसके उलट है वो यह कि किसी भी इंसान से मिलो तो पहले उसकी कमियों को बुराईयों को तलाशो. हमारी मिसाल उस मक्खी जैसी हो गयी हैं जो शरीर में गंदी जगह को तलाश के उसी पे जा बैठती है.

वैसे तो हम में अभी इनती इंसानियत बाकी है कि जब कोई मर जाता है तो उसकी बुराई करना , उसकी कमियों को याद करना हमें अच्छा नहीं लगता. और अगर कोई बुराई करता भी है तो यही कहते हैं जाने दो अब वो नहीं रहा क्या उसकी कमियाँ गिनाना.


लेकिन ऐसे भी लोग मौजूद हैं जो केवल इसलिए कि मरने वाला उनसे अधिक होशियार था और उसके जीवन काल में उस से किसी विषय पे बहस के बाद जीत संभव नहीं थी ,उसके जीवन काम में तो उसे पिता तुल्य बताते हैं लेकिन मरने के बाद उसकी आलोचना करने लगते हैं.

क्यों कि यह जानते हैं अब मरने वाला जवाब देने के लिए आने वाला नहीं. झूट सच जो चाहे उसके नाम से बोलो और अपने दिल की हर वो भड़ास निकाल लो जो उसके जीवन काल में नहीं निकाली जा सकी.


मुझे तो ऐसी हरकत कायरता के सिवा कुछ और नहीं लगती.क्या आप को यह किसी समझदार और शेरदिल इंसान का काम लगता है?

Tuesday, September 20, 2011

जाने वाले लौट के फिर कभी नहीं आते

.......जी हाँ यह बात हम सभी जानते हैं कि इस दुनिया से जाने  वाले  लौट  के फिर कभी नहीं आते. इसीलिये तो लोग अपने चाहने वालों के लिए दुआ भी करते नज़र आते हैं कि ऐ जाने वाले हो सके तो लौट के आना. इसी प्रकार यह भी सत्य है कि इस दुनिया से जाने वाला कभी जाना नहीं चाहता और इस कारण उसका इस दुनिया के लोगों से प्रेम हुआ करता है.   यदि दुनिया से जाने वाले के हाथ में या ताक़त हो कि वो जब चाहे वो लौट सकता है तो यकीन जानिए ९९% जाने वाले अवश्य लौट के आ जाते.


यह तो बात हुई दुनिया वालों कि लेकिन इस ब्लॉग जगत में इसका उल्टा ही देखने को मिलता है. जाने वाला फिर लौट के अवश्य आता है. कभी २-४ दिन में ही लौट आता है कभी २-४ महीने और साल भर  के बाद.


ऐसा इसलिए होता है कि हिंदी ब्लॉगजगत में जितने भी ब्लोगर हैं यह एक परिवार कि तरह हैं. यह एक दूसरे से नाराज़ होते हैं ,बहस भी करते हैं, मुहब्बत भी करते हैं, मिलते हैं , अलग होते हैं लेकिन एक दूसरे से जुड़े होते हैं.


इनमें से कभी कभी किसी नाराज़गी के कारण कोई अधिक दुखी हो जाता है तो वो जाने का एलान कर देता है, कुछ लोग ज़रा होशियार होते हैं तो  टिप्पणी बंद करने का एलान कर देते हैं.
अपने किसी ब्लोगर साथी के ब्लॉगजगत को अलविदा कहने कि खबर दूसरे ब्लोगर को सच कहिये तो अच्छी नहीं लगती.


अब नाराज़गी के कारण कोई ब्लोगर चला भी गया तो इस परिवार से बहुत दिन दूर नहीं रह पाता  और एक दिन अपनों के बीच फिर से वापस आ जाता है  और तारीफ कि बात यह है कि ब्लॉगजगत उसकी वापसी पे स्वागत भी करता है और अपनी ख़ुशी भी ज़ाहिर करता है.


इसीलिये मैंने कहा कि ब्लॉगजगत में जाने वाले लौट के फिर अवश्य आते हैं और उनको आना भी चाहिए आखिर अपनों  से अधिक दिनों तक दूर  कोई कैसे रह  सकता  है .




किसी तकरार को दरार ना बनने देना


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Wednesday, September 14, 2011

हिंदी बोला तो नौकरी नहीं मिलेगी.

आज हिंदी दिवस है और हिंदी ब्लॉगजगत के लिए तो यकीनन विशेष दिन है. सभी तरफ से हिंदी दिवस कि शुभकामनाओं के लेख़ पढने को मिल रहे हैं. लोग इसकी उन्नति कि दुआएँ कर रहे हैं. लेकिन क्या हम स्वम ही अपनी राष्ट्र भाषा के साथ सौतेलेपन का व्यवहार नहीं कर रहे? यह हम ही हैं जिसने हिंदी भाषा के उपयोग को अब केवल हिंदी साहित्य कि किताबों तक सीमित कर दिया है.

आज हिंदुस्तान के जो राज्य हिंदी भाषी राज्य कहे जाते हैं वहाँ के लोगों को विषय ज्ञान दूसरों से अधिक होने के बावजूद हिंदी बोल ना पाने के कारण नौकरियां नहीं मिल पाती. यह भी देखने कि बात है ही अंग्रेजी भाषा पे इन हिंदी भाषी राज्य के लोगों कि पकड़ अधिक मज़बूत होती है यह उन अंग्रेजी बोलने वालों से अच्छा लिख सकते हैं लेकिन बोलने मैं पीछे रह जाने के कारण इनको प्राथमिकता नहीं दी जाती.

जब कि इन हिन्दुस्तान मैं अधिकतर नौकरियों मैं अंग्रेजी का इस्तेमाल अंग्रजों के ज़माने कि देन है आवश्यकता नहीं. हमें मार्केटिंग करनी है हिंदी भाषियों के बीच और इण्टरव्यू लिया जा रहा है अंग्रेजी मैं. होना तो यह चाहिए कि हमें अपने हिंदुस्तानिओं से हिंदी मैं बात चीत करने चाहिए लेकिन हम भी अंग्रेजी मैं बोलने वाले कि बात जल्द समझ जाते हैं और माल खरीद लेते हैं.

जो अंग्रेजी बोलता है उसे हम ज्ञानी समझते हैं. अंग्रेजी अन्तर्राष्ट्रीय भाषा है और इसे सीखना भी ज़रूरी है लेकिन हिन्दुस्तान मैं जहाँ इसकी आवश्यकता नहीं वहाँ इस भाषा को ना बोल पाने वालों को नौकरियों के काबिल ना समझना कहाँ तक उचित है?
आज हिंदी दिवस पे शुभकामनाओं के साथ मैं यही कहूँगा कि अपनी राष्ट्र भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दें और अधिक से अधिक इस्तेमाल करें.

Sunday, September 11, 2011

अपना डोमेन लेने के फायदे





bigrock
आज हर अपनी हर चीज़ को इंसान व्यक्तिगत बनाना चाहता है. हम सभी अपना ब्लॉग चलाने के लिए ब्लागस्पाट या वर्डप्रेस इत्यादि कि सहता लेते हैं लेकिन इस्पे ब्लॉग के नाम के साथ ब्लॉगर या वर्डप्रेस लगा रहता है. वर्डप्रेस तो आप को अपनी पसंद का नाम (डोमेन) लगाने के पैसे लेता है लेकिन ब्लोगर ने यह सुविधा मुफ्त दी हुई है.केवल आप को अपनी पसंद का डोमेन लेना होता है और उसी सेट्टिंग मैं जा के लगाना होता है जो कि बहुत ही आसान है. कुल मिला के ९० रुपये से ले के ५०० रुपये सालाना का खर्च आता है.

इसके फायदे तो बहुत हैं लेकिन ब्लोगर मैं सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी कारण आप का ब्लॉग बंद हो गया, या किसी ने हैक कर लिया या ब्लोगर महाराज के किसी अपडेट के कारण पोस्ट गायब हो गयी तो आप नया ब्लॉग फ़ौरन बना कर उसी पुराने डोमेन नाम के साथ जोड़ सकते हैं .पाठक वंही पहुँच जाएगा क्यों कि पढ़क तो आप का डोमेन नाम याद रखता है.
इस प्रकार बिना पाठक खोए आप नए ब्लॉग पे अपने सभी चाहने वालों को ले जा सकते हैं.

मेरा ब्लॉग अमन का पैग़ाम पहले कहीं और था जो ब्लोगर महाराज कि दया से अक्सर बंद हो जाता था. मैंने उसकी फाइल अपलोड कर के नए ब्लॉग पे लगा दी और नाम http://www.amankapaigham.com वहाँ लगा दिया.
किसी भी पाठक को कोई असुविधा नहीं हुई और ना ही इस बदलाव के कारण ब्लॉग कभी बंद हुआ.आज कल तो प्रथम वर्ष के लिए आपकी पसंद के नाम का .IN डोमेन केवल ९९ रुपये मैं मिल रहा है.

मुझे तो लगता है जैसे मैंने अपनी चिंता कम कि आप सभी को भी कम कर लेनी चाहिए. जब ब्लोगर यह सुविधा मुफ्त मैं दे रहा है तो उसका फायदा क्यों ना उठाया जाए?

Saturday, September 10, 2011

विंडोज़ लाइव राइटर ब्लोगर्स के लिए एक तोहफा






amankapaigam[11]पिछले दिनों मैं कोशिश कि के अपने कुछ ब्लोगर्स  भाई कुछ आमदनी कर सकें ब्लोगिंग के साथ साथ और मुझे देख के ख़ुशी हुई कि कई ब्लोग्गेर्स से हिंदी के ब्लॉग के साथस आठ अंग्रेजी का ब्लॉग बनाया और गूगल एडसेंस से कमाई  कर रहे हैं.
मैंने बचपन  से सीखा ज्ञान बाँटने से बढ़ता है और यदि आप के ज्ञान से अपने दूसरे भाइयों का फायेदा होता है तो इस से बढ़िया क्या बात हो सकती है. मुझे अपना ज्ञान दूसरों मैं बंट के उनका फायेदा होते देख, उनको खुश होते देख बहुत ख़ुशी होती है.


जी हाँ ब्लोगर्स के लिए यह विंडोज़ लाइव राइटर एक तोहफा है जिसका इस्तेमाल करते हुए आप अपने लेख़ को बेहतरीन तरीके से सजा सकते हैं.
आज विंडोज़ लाइव राइटर पे सभी ब्लॉगर को लिखने कि सलाह दे रहा हूँ. जी हाँ ब्लॉग लेखन का उन्नत औजार है  विंडोज़ लाइव राइटर . विंडोज लाइव राइटर में बहुत सी खूबियां हैं जैसे जैसा देखो वैसा पाओ एडिटर,आसान फोटो-पब्लिशिंग, वीडियो लगाने की सुविधा, श्रेणियाँ (Tagging), HTML मोड में पूर्वालोकन , “Web Layout” मोड में लिखने से आप को लगता है कि जैसे आप अपने ही ब्लॉग में लिख रहे हों. यानि आपको लिखते हुए पोस्ट जैसी दिखाई देगी, पब्लिश होने पर ठीक वैसी ही होगी. इसके अलावा इसमें नये फीचर जोड़ने के लिये प्लगइन भी जोड़े जा सकते हैं.यदि आपका ब्लॉग वर्डप्रेस में है तो आप इसमें पोस्ट स्लग भी लगा सकते हैं. इससे आप अपने लेख का प्रिंट भी ले सकते हैं. इसका इंटरफेस बिल्कुल माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की तरह है तो इसको सीखने में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती.


यहाँ जो मैंने इस लेख़ मैं background लगाया है आप भी अपनी पसंद कि तस्वीर को लगा सकते हैं और मैंने तस्वीर मैं बेज़बान लिखा है वो भी आप बिना किसी मेहनत के कर सकते हैं.
नए विंडोज़ लाइव राइटर 2011 को आप यहाँ http://explore.live.com/windows-live-writer?os=other से डाउनलोड कर सकते हैं.
किसी भी तरह कि सहायता के लिए आप संपर्क कर सकते हैं.